गुस्ताखियाँ तेरी न क़ाबिल थीं दरगुज़र
लेकिन मेरे जज़्बात ने तुझे माफ़ कर दिया
तू बेवफ़ा था, ये हक़ीक़त मुझे पता भी थी
फिर भी मेरे यक़ीं ने तुझ पे ऐतबार कर दिया
हर एक ज़ख़्म अपना तेरे नाम कर दिया
दिल ने दिमाग़ का हर एक हिसाब कर दिया
इंसाफ़ मांगता तो तेरा कुछ भी नहीं बचता
मैंने ही रहम करके ख़ुद को दाग़दार कर दिया
तेरी ख़ामोशियाँ भी इल्ज़ाम बन गईं मुझ पर
मैंने हर एक सवाल को बेअसर कर दिया
ये इश्क भी अब किसी ग़लती का नाम है
जिसे निभा के मैंने ख़ुद को तबाह कर दिया
वो इश्क़ जो कभी वजूद की वजह थी
उसी ने आज जीने से इनकार कर दिया
न तेरा कसूर बचा, न मेरा कोई हुनर
हम दोनों ने मिल के ख़्वाबों का क़त्ल कर दिया
मैं चाहता भी तो अब क्या चाहता तुझसे
दिल ने ही हर सवाल को बे-मानी कर दिया
वफ़ा, यक़ीं, उम्मीद — सब लफ़्जों के नाम है
मोहब्बत ने ख़ुद को ही शर्मसार कर दिया
सब कहते रहे कि छोड़,बचा ख़ुद तू अजय
मेरे इश्क ने मगर मुझे लाचार कर दिया
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