तुम पर यक़ीन आए तो अजय आए कैसे
ऐतबारों के कत्ल में साज़िश तुम्हारी है
सच्चाई को भी तुमने फ़सानों में ढाला है
अब किस तरह कहें कि ये कहानी हमारी है
दिल के शहर में फिर से उदासी का धुंआ है
क्या किसी के ख़्वाब की पुरानी उधारी है
राह-ए-वफ़ा में जितने भी मंज़र थे देखने
हर एक मोड़ पे बस तेरी यादें ही जारी है
दिल को यकीं दिलाने की कोशिश बहुत ही की
पर धड़कनों ने माना कि कमी अब भी तुम्हारी है
तन्हाइयों ने हमसे कई किस्से उधार लिए
हर गजल में मैने, तेरी ही तस्वीर उभारी है
हमने तो ज़िंदगी से शिकायत कभी नहीं किया
पर तेरे बाद हर साँस पे शिकवा भी जारी है
कतरा-कतरा मुन्तशिर हुए हम तेरी चाह में
और तुमने समझा शायद, लाचारी हमारी है
मिलकर भी वो क़रीब, न आया ज़रा हमें
लगता है उसके दिल में कोई और जारी है
हमने तो सिर्फ़ चाहा था, तुझे महसूस कर सकें
तुमने तो चाहतों की अलग ही तिजारत संवारी है
अब किससे अपने दर्द की तफ़सील मांगें हम
जब हर फैसले में छिपी हुई रज़ा तुम्हारी है
यह इश्क़ है न कोई सियासत का मामला
हर लफ़्ज़ में दख़लअंदाज़ी तुम्हारी जारी है
अब सोचता हूं "अजय" कि कैसे यकीं करूं
जब इश्क में ही शामिल साज़िश तुम्हारी है
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Heart ♥️ touching lines - Jabardast